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शांति एवं सौहार्द की ओर

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इनके व्यक्तित्व के बहुत से आयाम हैं. आप एक लेखक, संगीतकार, मूर्तिकार, फोटोग्राफर तथा एक आध्यात्मिक व्यक्ति हैं. Marketing Consultant के रूप में इनका कैरियर 20 वर्षों से भी अधिक का है. अपने बहुआयामी व्यक्तित्व के हर पहलू को यह बड़ी ही कुशलता के साथ संतुलित करते हैं.  जीवन के हर क्षण को पूर्णता में जीने वाले व्यक्ति हैं श्री विजय कुमार सप्पति. विजयजी तेलगू भाषी हैं किंतु हिंदी भाषा को दिया गया योगदान महत्वपूर्ण है. हंस, सोंच विचार, कादम्बनी जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में समय समय पर इनकी कहानियां, कविताएं तथा आलेख छपते रहते हैं. किंतु इनकी पहली पसंद Internet है. जिसकी पहुँच का दायरा बहुत बड़ा है. अब तक इनका एक कविता संग्रह 'उजले चांद की बेचैनी' तथा एक कहानी संग्रह 'एक थी माया' प्रकाशित हो चुके हैं. इनकी रचनाओं को कई भारतीय भाषाओं में अनूदित किया जा चुका है.  विजयजी का मानना है कि हिंदी को इस विविधताओं से भरे देश को एक सूत्र में बांधने वाली भाषा के रूप में प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. विजयजी का लेखन वास्तविक्ता के बहुत करीब है. वह समाज में आए दिन घटित होने वाली ...

हौंसले की मिसाल 'डॉ. सुंकी कार्तिक'

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'मन के हारे हार है और मन के जीते जीत'. जीवन मे वास्तविक पराजय तब होती है जब आप मन से हार जाते हैं. जो वय्क्ति मन को मजबूत बनाए रखता है और कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नही हारता वह हालातों को अपने पक्ष में कर जीत हांसिल करता है.  तेलंगाना के रहने वाले डॉ. सुंकी कार्तिक ऐसे ही ना झुकने वाले हौंसले की मिसाल हैं. Paraplegic डॉ. सुंकी Wheelchair पर बैठ कर मरीज़ देखते हैं. अपनी शारीरिक अवस्था को इन्होंने अपने काम में अड़चन नही बनने दिया. इनके समर्पण तथा कार्यकुशलता से प्रभावित होकर राज्य सरकार ने इन्हें June 2015 में 'Best Doctor Award' से सम्मानित किया. डॉ. सुंकी का जीवन भी एक आम युवक की भांति ही चल रहा था. वह MBBS तीसरे वर्ष के छात्र थे. तभी समय ने इनकी परीक्षा लेने की ठानी. 10 दिसंबर 2011 में डॉ. सुंकी एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए. प्रारंभ में चिकित्सकों ने आश्वासन दिया कि सर्जरी के बाद तीन माह में वह अपने पैरों पर खड़े होने लगेंगे. उम्मीद के साथ वह उस क्षण की प्रतीक्षा करने लगे. तीन माह बाद जब यह संभव ना हो सका तो कुछ हद तक वह निराश हुए लेकिन शीघ्र ...

एक अनोखी 'बेकरी'

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जब हौंसले और सकारात्मक सोंच का संगम होता है तो उसका नतीजा भी कुछ अनोखा ही होता है. 'साई बेकरी' भी इसी संगम से उपजी है. यह एक अनूठा प्रयास है जहाँ स्वाद के साथ साथ खुशियां भी पकती हैं. इस बेकरी का संचालन   2 0   से  3 0   वर्ष के ऐसे युवाओं द्वारा किया जाता है जो किसी भी प्रकार की Developmental Disabilities  जैसे  Cerebral Palsy, Mental Retardation, Autism   आदि से ग्रसित हैं.   यह बेकरी इन सभी युवाओं को उनके भीतर छिपी हुई प्रतिभा को उजागर करने का अवसर देती है. यहाँ वह आपस में घुलते मिलते हैं जिसके कारण वह समाज के साथ संवाद स्थापित करना भी सीखते हैं. इन सबके ऊपर यहाँ काम करते हुए उन्हें इस बात का एहसास होता है कि वह भी समाज के उपयोगी अंग हैं. यह एहसास उनके आत्मविश्वास को बढ़ा देता है.  इस Bakery मे  25  से भी अधिक प्रकार की अंडे तथा मक्खन रहित Whole Wheat Multi grain Cookies का उत्पादन किया जाता है.                                   ...

'एक पहल' सामाजिक समानता की ओर

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एक सफल समाज की पहचान यही है कि वहाँ सभी वर्गों को समान अधिकार हों. उन लोगों को भी जिन्हें विशेष देखभाल की ज़रुरत होती है. ऐसे व्यक्ति जो शारीरिक तथा मानसिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे लोगों को समाज में उनका हक दिलाने तथा एक ऐसे जीवन के लिए तैयार जहाँ वह आत्मसम्मान से जीवन व्यतीत कर सकें विशेष प्रयासों की ज़रुरत पड़ती है. बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपना जीवन इसी उद्देश्य के लिए समर्पित किया है. ऐसे ही एक युवा हैं 24 वर्षीय मोहम्मद उवेद. उवेद पेशे से एक Special Educator हैं जो उन बच्चों के लिए काम करते हैं जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यक्ता पड़ती है. Rehabilitation Council of India के तहत इन्होंने स्वयं को 'Rehabilitation Professional in Mental Retardation' के रुप में पंजीकृत करा रखा है. वर्तमान में उवेद GB Senior Secondary School नई दिल्ली में Special Education Teacher (Guest teacher) के रूप में काम कर रहे हैं. इसके अतिरिक्त उवेद कई NGO तथा Special Education institutes के साथ जुड़़े हैं. Dr. Bhimrao Ambedkar University Agra से Graduation करने के बाद उवेद ने...

जीवन चलने का नाम

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जिस प्रकार नदी अपने रास्ते में आने वाले अवरोधों को पार करते हुए सदैव आगे बढ़ती है उसी प्रकार जीवन की उपियोगिता भी बाधाओं को चुनौती देते हुए निरंतर आगे बढ़ने में है. सारी बाधाओं को पार कर आगे बढ़ते रहने का नाम है जीवन. जो जुझारू लोग ऐसा साहस करते हैं उन्हें ही ज़िंदगी गले लगाती है.  शिवानी गुप्ता एक ऐसे ही हौंसलामंद व्यक्तित्व का नाम है. इनके भीतर की जिजीविषा ने बाधाओं के भी हौंसले पस्त कर दिए. ज़िंदगी ने आगे बढ़ कर इन्हें गले लगाया है.  Hotel management का Course करने के बाद शिवानी दिल्ली के Maurya Sheraton hotel में Public Relations Officer के पद पर काम कर रही थीं. वहाँ से त्यागपत्र देकर उच्च शिक्षा का सपना अपनी आंखों संजोए 22 साल की शिवानी विदेश जाने को तैयार थीं. उन्हें विदाई देने के लिए एक पार्टी का आयोजन किया गया. देर रात वह अपने प्रेमी तथा अन्य मित्रों के साथ कुछ मित्रों को घर छोड़ने तथा ताज़ी हवा खाने के इरादे से बाहर निकलीं. शिवानी अपने प्रेमी के साथ एक कार में थीं तथा अन्य कार में इनके मित्र थे. रात के सन्नाटे में खाली सड़क पर कारें तेज़ी से दौड़ रही थ...

सुरों का सुखद 'स्पर्श'

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उसकी आवाज़ का जादू लोगों को मदमस्त कर देता है. उसके सुरों की लहर सुनने वालों की आत्मा को आनंदित कर देती है. अपने हुनर से करोड़ों दिलों को छू लेने वाला महज 12 वर्ष का एक बच्चा है जिसका नाम स्पर्श शाह है. स्पर्श अमेरिका के रहने वाले हैं. इन्हें लोग पुरिदम (Purythum) के नाम से भी जानते हैं. स्पर्श बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी हैं. एक तरफ जहाँ कुदरत ने उनकी आवाज़ को मिठास से नवाज़ा है वहीं कुशाग्र बुद्धि का तोहफा भी दिया है. तकरीबन 7 सालों से भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखने के साथ साथ पिछले तीन सालें से American Vocal की भी शिक्षा ले रहे हैं. वह दस से अधिक गीत लिख चुके हैं. इनमें से अधिकांश का संगीत भी इन्होंने ही रचा है. इसके अतिरिक्त वह 40 से भी अधिक Live Performances, स्थानीय Radio तथा Television Shows में हिस्सा ले चुके हैं. कई संस्थाओं के लिए तथा प्राकृतिक आपदाओं के समय वह Fund Raising का भी काम करते हैं. स्पर्श एक अच्छे लेखक व वक्ता भी हैं. इतनी उपलब्धियां पाने वाले स्पर्श के जीवन का एक और पहलू भी है. वह एक गंभीर रोग से ग्रसित हैं. Osteogenesis Imperfecta   एक दु...

सामाजिक चेतना के जनक

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इस वर्ष संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेदकर की 125 जयंति है. डॉ. अंबेदकर ने हमें एक ऐसा संविधान दिया है जहाँ धर्म जाति लिंग किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना सभी भारतीय नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं.  मेरे लिए बाबासाहेब भीमराव अंबेदकर वह आवाज हैं जिसने सदियों से शोषित व उपेक्षित लोगों को झझकोर कर रख दिया जिन्हें हिंदू समाज की जातिगत व्यवस्था में सबसे नीचे स्थान दिया गया है. वह आवाज जिसने उनके भीतर आत्मसम्मान से जीने की ज्वाला पैदा की. बाबासाहेब ने ना सिर्फ दलितों के सामाजिक हितों वरन् उनके राजनैतिक अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी. दलित समाज की अस्मिता की लड़ाई का बिगुल ना केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बजाया. सामाजिक तथा राजनैतिक आलोचना, तिरस्कार एवं भेद भाव पूर्ण रवैये की परवाह किए बिना दलितों को उनके अधिकार दिलाने के अपने लक्ष्य पर डटे रहे. दलितों के मुद्दों को धैर्य, साहस और ईमानदारी के साथ उठाते रहे.  उनकी लड़ाई सामाजिक स्वतंत्रता, राजनैतिक तथा आर्थिक सशक्तिकरण के साथ साथ दलित समाज में सम्मान की उस भावना को जागाने के लिए थी जो सदियों के शोषण द्वार...