निश्चित लक्ष्य
हम में से बहुत जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं किन्तु भ्रमित रहते हैं की क्या करें। क्योंकि हम अपने जीवन में कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं करते हैं।
जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना अत्यंत आवश्यक है। बिना निर्धारित लक्ष्य के हमारी शक्तियां निरर्थक कार्यों में बेकार चली जाती हैं। लक्ष्यविहीन व्यक्ति सागर में भटकती उस नौका की तरह होता है जिसका कोई खेवनहार नहीं होता है और जो समुद्र के थपेड़ों में इधर से उधर भटकती रहती है। इस दृष्टि से लक्ष्य हमारी जीवन रुपी नाव का खेवनहार होता है जो उसे सही दिशा प्रदान करता है।
निश्चित लक्ष्य होने पर व्यक्ति अपनी क्षमताओं का सही प्रयोग कर सकता है। क्योंकि वह जानता है की उसे कहाँ जाना है। उसका लक्ष्य उसे प्रेरित करता रहता है। अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए वह हर आवश्यक कदम उठाता है।
निश्चित लक्ष्य मष्तिष्क को एक बिंदु पर केन्द्रित करने में मदद करता है। मष्तिष्क तभी अपनी पूर्ण क्षमता का प्रयोग करता है जब वह एक बिंदु पर केन्द्रित रहता है। अन्यथा उसकी सारी शक्ति इधर उधर भटकने में चली जाती है।
हम सभी में असीम क्षमताएं हैं। जो हमारे भीतर सुप्तावस्था में हैं। आवश्यकता उन्हें जगाने की है। जब हम एक निश्चित लक्ष्य की और बढ़ते हैं तो हमारी समस्त इन्द्रियां एकाग्र होकर उस पर लक्षित होती हैं जो हमारे भीतर छिपी उन शक्तियों को जागृत कर देती हैं जो लक्ष्य प्राप्ति में सहायता कर सकती हैं।
जो व्यक्ति एक निश्चित उद्देश्य को समर्पित होता है वह कभी भी कठिनाईयों से नहीं घबराता है। क्योंकि उसमें अपने उद्देश्य को पूरा करने का जूनून होता है। अतः वह मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं से टकरा जाता है और उन्हें ध्वस्त कर देता है।
वह कभी भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित नहीं होता है। नकारात्मक विचार उसे परेशान नहीं करते हैं क्योंकि उसका मन सदैव अपने लक्ष्य पर केन्द्रित होता है। असफलता भी उसे निरुत्साहित नहीं कर पाती हैं क्योंकि उसे हर हाल में अपना लक्ष्य प्राप्त करना होता है। गिर कर वह पुनः उठ जाता है और उसी जोश से पुनः अपने लक्ष्य की और बढ़ने लगता है।
निश्चित लक्ष्य के बिना हम अपनी शक्तियों का पूर्ण प्रयोग नहीं कर पाते हैं। लक्ष्यविहीन मनुष्य अधिकतर बेकार की चीज़ों में उलझा रहता है। उसके लिए जीवन अक्सर बहुत उबाऊ हो जाता है और एक हताशा उसे घेर लेती है। यह हताशा आगे चलकर अवसाद का रूप ले लेती है। अवसाद किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत घातक होता है।
अतः आवश्यक है की हम अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करें। सदैव उस लक्ष्य पर ही ध्यान लगायें। जब हम पूरे आत्मविश्वास के साथ उसकी ओर बढ़ेंगे तो राह अपने आप निकलती जायेगी। कठिनाईयाँ भी स्वयं किनारा कर लेंगी।
जीवन बहुमूल्य है। अतः इसका सदुपयोग करें। अपनी क्षमातायों का अपने तथा दूसरों के हित में प्रयोग करें। निश्चित लक्ष्य इस उद्देश्य में हमारी सहायता करता है।
जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना अत्यंत आवश्यक है। बिना निर्धारित लक्ष्य के हमारी शक्तियां निरर्थक कार्यों में बेकार चली जाती हैं। लक्ष्यविहीन व्यक्ति सागर में भटकती उस नौका की तरह होता है जिसका कोई खेवनहार नहीं होता है और जो समुद्र के थपेड़ों में इधर से उधर भटकती रहती है। इस दृष्टि से लक्ष्य हमारी जीवन रुपी नाव का खेवनहार होता है जो उसे सही दिशा प्रदान करता है।
निश्चित लक्ष्य होने पर व्यक्ति अपनी क्षमताओं का सही प्रयोग कर सकता है। क्योंकि वह जानता है की उसे कहाँ जाना है। उसका लक्ष्य उसे प्रेरित करता रहता है। अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए वह हर आवश्यक कदम उठाता है।
निश्चित लक्ष्य मष्तिष्क को एक बिंदु पर केन्द्रित करने में मदद करता है। मष्तिष्क तभी अपनी पूर्ण क्षमता का प्रयोग करता है जब वह एक बिंदु पर केन्द्रित रहता है। अन्यथा उसकी सारी शक्ति इधर उधर भटकने में चली जाती है।
हम सभी में असीम क्षमताएं हैं। जो हमारे भीतर सुप्तावस्था में हैं। आवश्यकता उन्हें जगाने की है। जब हम एक निश्चित लक्ष्य की और बढ़ते हैं तो हमारी समस्त इन्द्रियां एकाग्र होकर उस पर लक्षित होती हैं जो हमारे भीतर छिपी उन शक्तियों को जागृत कर देती हैं जो लक्ष्य प्राप्ति में सहायता कर सकती हैं।
जो व्यक्ति एक निश्चित उद्देश्य को समर्पित होता है वह कभी भी कठिनाईयों से नहीं घबराता है। क्योंकि उसमें अपने उद्देश्य को पूरा करने का जूनून होता है। अतः वह मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं से टकरा जाता है और उन्हें ध्वस्त कर देता है।
वह कभी भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित नहीं होता है। नकारात्मक विचार उसे परेशान नहीं करते हैं क्योंकि उसका मन सदैव अपने लक्ष्य पर केन्द्रित होता है। असफलता भी उसे निरुत्साहित नहीं कर पाती हैं क्योंकि उसे हर हाल में अपना लक्ष्य प्राप्त करना होता है। गिर कर वह पुनः उठ जाता है और उसी जोश से पुनः अपने लक्ष्य की और बढ़ने लगता है।
निश्चित लक्ष्य के बिना हम अपनी शक्तियों का पूर्ण प्रयोग नहीं कर पाते हैं। लक्ष्यविहीन मनुष्य अधिकतर बेकार की चीज़ों में उलझा रहता है। उसके लिए जीवन अक्सर बहुत उबाऊ हो जाता है और एक हताशा उसे घेर लेती है। यह हताशा आगे चलकर अवसाद का रूप ले लेती है। अवसाद किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत घातक होता है।
अतः आवश्यक है की हम अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करें। सदैव उस लक्ष्य पर ही ध्यान लगायें। जब हम पूरे आत्मविश्वास के साथ उसकी ओर बढ़ेंगे तो राह अपने आप निकलती जायेगी। कठिनाईयाँ भी स्वयं किनारा कर लेंगी।
जीवन बहुमूल्य है। अतः इसका सदुपयोग करें। अपनी क्षमातायों का अपने तथा दूसरों के हित में प्रयोग करें। निश्चित लक्ष्य इस उद्देश्य में हमारी सहायता करता है।
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