एक बुनकर जो देश को बना रहा है 'डिजिटली' साक्षर


कहते हैं जो समय की नब्ज़ को पहचान कर उसके साथ स्वयं को बदलता है वह समझदार होता है. ऐसा व्यक्ति ना सिर्फ अपने जीवन में उन्नति करता है बल्कि समाज को भी नई दिशा दिखा सकता है.
मध्यप्रदेश चंदेरी के रहने वाले मुदस्सर अंसारी इस बात की जीती मिसाल हैं. मुदस्सर ने ना सिर्फ कंप्यूटर शिक्षा का प्रसार किया बल्कि 50 से भी अधिक शहरों वा गाँवों को Internet से जोड़ने में भी अपना योगदान दिया है.
मुदस्सर का ताल्लुक बुनकरों के परिवार से है. इनके लिए बुनकरी एक पेशा ही नही था वरन वह धरोहर थी जो एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को सौंपती थी. किंतु 90 के दशक में आए वैश्वीकरण के कारण जब सस्ता कपड़़ा बाजार में मिलने लगा तो कई बुनकरों को संकट का सामना करना पड़ा. अपना पारंपरिक काम छोड़ कर दूसरे रोजगार अपनाने पड़े.
मुदस्सर के पिता टूरिस्ट गाइड का काम करने लगे. परिवार चलाने के लिए इन्होंने भी एक टेलीफोन बूथ खोल लिया. किंतु दोनों की कमाई से भी परिवार चलाना कठिन था. परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए मुदस्सर रात दिन सिर्फ यह सोंचते कि कैसे आगे बढ़ा जाए. वह केवल बारहवीं कक्षा तक ही पढ़े थे. ऐसे में कोई अच्छी नौकरी मिलना भी कठिन था.
मुदस्सर ने महसूस किया कि हर क्षेत्र में कंप्यूटर का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है. कंप्यूटर वर्तमान समय की आवश्यक्ता बन गया है. अतः समय को परख कर इन्होंने कंप्यूटर का ज्ञान अर्जित करने का निश्चय किया. लेकिन कंप्यूटर की शिक्षा देने वाला संस्थान उनके गाँव से 30 कि.मी. दूर था. मुदस्सर इससे घबराए नही और इस चुनौती को स्वीकार कर लिया. अपनी मेहनत वा लगन के बल पर वह जल्द ही कंप्यूटर संचालित करने में दक्ष हो गए. इस बात से उनके पिता बहुत प्रसन्न हुए. वह गर्व के साथ सबको अपने बेटे की उपलब्धि के बारे में बताते थे. 2006 में मुदस्सर ने स्वयं का कंप्यूटर खरीदा. अब वह अन्य गाँव वालों को भी कंप्यूटर सीखने के लिए प्रेरित करने लगे.
2009 में Digital Empowerment Foundation (DEF) नामक NGO ने जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को Internet से जोड़ना था चंदेरी में एक Internet resource center की स्थापना की. उन्होंने मुदस्सर को भी अपने साथ शामिल कर लिया. यहाँ मुदस्सर ने Wireless networking का प्रशिक्षण लिया तथा DEF के साथ Networking engineer के तौर पर जुड़ गए.
जब DEF ने चंदेरी को WiFi से जोड़ने की योजना बनाई तब मुदस्सर ने इस काम में पूरे उत्साह से हिस्सा लिया. इसके अतिरिक्त 50 से भी ज़्यादा गाँव तथा शहरों को Internet से जोड़ने में इनकी अहम भूमिका रही.
लोगों में कंप्यूटर के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी इन्होंने अच्छा काम किया है. ग्रामीण महिलाओं को कंप्युटर सिखाने के लिए इन्होंने दो माह का एक पाठ्यक्रम बवाया. इसके तहत 2500 से भी अधिक महिलाओं को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया. कई स्थानों पर इन्होंने कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र खोलने में सहायता प्रदान की है.
उनका मानना है कि वर्तमान समय में कंप्यूटर का ज्ञान अति आवश्यक है. परंतु इस समय में भी बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्होंने कभी कंप्यूटर नही देखा. मुदस्सर का उद्देश्य ऐसे लोगों को भी कंप्यूटर से परिचित कराना है ताकि उनके जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सके.
अपनी सफलता का श्रेय वह कंप्यूटर को देते हें जिसके कारण आज वह इस योग्य बन सके कि अपने परिवार की ज़िम्मेदारियां भली भांति उठा सकते हैं. उनका मानना है कि यदि वह कंप्यूटर से परिचित ना होते तो आज भी शायद फोन बूथ चला रहे होते.

यह लेख Jagranjunction.com पर प्रकाशित हुआ है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

यादें

तत् त्वम् असि