संगीत मेरी प्रेरणा है


यदि आगे बढ़ने की चाह हो तो कुछ भी आपका रास्ता नही रोक सकता है. यह साबित कर दिखाया है सुधांशु व्यास ने. Muscular Dystrophy नामक बीमारी से ग्रसित सुधांशु अपनी हिम्मत और हौंसले के बल पर गायन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं. 
दस साल की उम्र में जब सुृधांशु को अपनी बीमारी का पता चला तो यह जानकर वह बहुत दुखी हुए कि उन्हें अब अपना जीवन व्हीलचेयर पर बिताना पड़ेगा. यह परिस्थिति बहुत पीड़ादाई थी. इस कठिन समय में संगीत के सात स्वरों ने उन्हें इस दुख से उबरने में सहायता की. जब भी वह संगीत सुनते तो अपनी तकलीफ को भूल कर खुशियों के संसार में चले जाते थे. अतः सुधांशु के परिवार ने उन्हें संगीत की तालीम देने का फैसला किया. 
सुधांशु का जन्म 3 जुलाई 1999 में एक संगीत प्रेमी घराने में हुआ. सुधांशु के दादा निरंजन व्यास जी को संगीत में गहरी रुचि है. इनके पिता तथा चचेरे भाइयों को भी संगीत में रुचि है. सुधांशु के परदादा श्री श्याम सुंदर व्यास जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे.
सुधांशु अब तक दस से भी अधिक स्टेज प्रस्तुतियां कर चुके हैं. रेडियो के एफ एम चैनल 94.3 पर सुधांशु ने गाना भी गाया है. सुधांशु को राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सम्मुख अपनी गायन क्षमता के प्रदर्शन का अवसर भी प्राप्त हो चुका है. हाल ही में 'मारवाड़ की आवाज़' प्रतियोगिता में सुधांशु को EXTRAORDINARY PERFORMANCE AWARD प्राप्त हुआ.
सुधांशु ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा श्री राम कुमार शर्मा जी से प्राप्त की. इसके बाद श्री जगदीश हर्ष जी से इन्होंने संगीत की बारीकियां सीखीं. वर्तमान में सुधांशु ग्वालियर घराने की श्रीमती सुहासिनी इच्छकरन जी से संगीत सीख रहे हैं. सुधांशु भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्नातक की डिग्री के लिए पढ़ाई भी कर रहे है. 
सुधांशु गायन के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं. बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध गायक अरिजित सिंह इनके आदर्श हैं. सुधांशु ने अरिजित के गाए कई गीतों को अपनी आवाज़ में रिकार्ड किया है. सभी रिकार्डिंग YouTube पर उपलब्ध हैं.
सुधांशु का मानना है कि यदि ज़िंदगी आपके सामने चुनौतियां पेश करे तो आप स्वयं को और मज़बूत बनाएं.

यह लेख Jagranjunction.com पर प्रकाशित है

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