मदद का 'साया'
मदद का 'साया'
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के रहने वाले मेरे Facebook मित्र वक़ार ख़ुर्शीद एक जिंदादिल इंसान हैं. अपनी ज़िंदगी में कई प्रकार की तकलीफों से गुजरने के बाद भी इन्होंने हिम्मत नही हारी.
बचपन में इनका एक पैर पोलियो ग्रस्त हो गया. पैरों में Braces पहन कर इन्होंने चलना शुरू किया. 12 वर्ष की अवस्था में जब यह मरी के P A F cadet college Boarding school में अपने भाई के साथ पढ़ रहे थे तब अचानक ही इन्हें पोलियो का एक दौरा पड़ा जिससे चलने में तकलीफ होने लगी. फिर भी इन्होंने हिम्मत नही हारी. धीरे धीरे ही सही चलना जारी रखा.
जब यह Bsc कर रहे थे तब यह सीढ़ियों से गिर पड़े. इनके सर पर गंभीर चोट लगी. काफी इलाज के बाद भी कोई फायदा नही हुआ. जीवन के दस साल इन्होंने बिस्तर पर पड़े हुए काटे. इस दौरान इनकी दुनिया इनके कमरे तक सिमट गई. ऐसे में किसी फरिश्ते की भांति पाकिस्तान के NGO SAAYA Foundation ने इनके जीवन में कदम रखा. SAAYA Association शारीरिक रूप से अक्षम लोगों का समूह है. इसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों की स्थिति सुधारने में उनकी सहायता करना है ताकि वह समाज में सर उठा कर जी सकें.
वक़ार SAAYA से जुड़े असीम भाई के दिल से शुक्रगुजार हैं. उन्हीं के प्रयासों से वह SAAYA के साथ जुड़ पाए. SAAYA के प्रयासों से आज वक़ार एक ख़ुशहाल और स्वावलंबी जीवन जी रहे है.
बचपन में इनका एक पैर पोलियो ग्रस्त हो गया. पैरों में Braces पहन कर इन्होंने चलना शुरू किया. 12 वर्ष की अवस्था में जब यह मरी के P A F cadet college Boarding school में अपने भाई के साथ पढ़ रहे थे तब अचानक ही इन्हें पोलियो का एक दौरा पड़ा जिससे चलने में तकलीफ होने लगी. फिर भी इन्होंने हिम्मत नही हारी. धीरे धीरे ही सही चलना जारी रखा.
जब यह Bsc कर रहे थे तब यह सीढ़ियों से गिर पड़े. इनके सर पर गंभीर चोट लगी. काफी इलाज के बाद भी कोई फायदा नही हुआ. जीवन के दस साल इन्होंने बिस्तर पर पड़े हुए काटे. इस दौरान इनकी दुनिया इनके कमरे तक सिमट गई. ऐसे में किसी फरिश्ते की भांति पाकिस्तान के NGO SAAYA Foundation ने इनके जीवन में कदम रखा. SAAYA Association शारीरिक रूप से अक्षम लोगों का समूह है. इसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों की स्थिति सुधारने में उनकी सहायता करना है ताकि वह समाज में सर उठा कर जी सकें.
वक़ार SAAYA से जुड़े असीम भाई के दिल से शुक्रगुजार हैं. उन्हीं के प्रयासों से वह SAAYA के साथ जुड़ पाए. SAAYA के प्रयासों से आज वक़ार एक ख़ुशहाल और स्वावलंबी जीवन जी रहे है.


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