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उम्र कम लेकिन हुनर बड़ा

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उम्र कम लेकिन हुनर बड़ा 'यह सपने के पूरा होने जैसा है. मैं मेहनत कर रहा हूँ क्योंकी सफलता का कोई शार्टकट नही होता है.' यह कहना है 2015 के Junior Golf World championship विजेता शुभम जगलान का. यह कारनामा उन्होंने 2012 में केवल 9 वर्ष की आयु में भी कर दिखाया था.  16 अगस्त 2004 को शुभम का जन्म हरियाणा के इसराना गांव में हुआ था. घर में दूध का कारोबार होता था. पहलवानों के इस गांव में किसी ने भी Golf का नाम नहीं सुना था. Golf से शुभम का रिश्ता तब जुड़़ा जब कपूर सिंह नाम के एक NRI ने इनके गांव में आकर एक Golf Academy आरंभ की जिसका उद्देश्य बच्चों में Golf के प्रति रुझान पैदा करना था ताकि नई प्रतिभाओं को तलाशा जा सके. शुभम ने भी इस Academy में दाखिला लिया. Academy तो कुछ दिन में बंद हो गई लेकिन शुभम का रिश्ता Golf से सदा के लिए जुड़़ गया.  अपने Desktop पर YouTube पर Tiger Woods जैसे महान खिलाड़ियों का खेल देखकर इन्होंने प्राप्त सीमित संसाधनों के द्वारा Training जारी रखी. इस दौरान शुभम ने अपनी आयु वर्ग में कई Tournaments में भाग लिया. इस दौरान भारत की बेहतरीन Golf खिलाड़ी नोनीता...

सूखे में मदद की फुहार

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सूखे में मदद की फुहार हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है. लेकिन देश के हर प्रांत में किसानों का हाल बेहाल है. आज भी किसान सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भर हैं. सूखे की दशा में फसल नष्ट होने पर कर्ज के बोझ से दबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं. आए दिन समाचारपत्रों में इस तरह के समाचार छपते हैं. TV Shows में इस पर चर्चा होती है. किसानों की इस बदहाली पर हम सब अफसोस तो करते हैं किंतु बहुत कम लोग ही हैं जो कुछ करते हैं.  फिल्मजगत के प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर उन चंद लोगों में से हैं जो चुपचाप बैठ कर देखने की बजाय कुछ करने में यकीन रखते हैं. अपनी भूमिकाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त अव्यवस्था और अराजकता एवं उसके प्रति हमारी उदासीनता पर तीखी चोट करने वाले नाना जब भी किसानों की दुर्दशा के बारे में सुनते तो उनके मन में कुछ करने की भावना जागती. आरंभ में उन्होंने अपनी कुछ व्यक्तिगत पूंजी से किसानों की मदद आरंभ की.  शीघ्र ही उन्होंने महसूस किया कि यह समस्या बहुत बड़ी है अतः इस पर वृहद पैमाने पर सोंचने की आवश्यक्ता है. फिल्मजगत के अपने एक मित्र मकरंद अनसपुरे के साथ मिलकर नाना...

मदद का 'साया'

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मदद का 'साया' पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के रहने वाले मेरे Facebook मित्र वक़ार ख़ुर्शीद एक जिंदादिल इंसान हैं. अपनी ज़िंदगी में कई प्रकार की तकलीफों से गुजरने के बाद भी इन्होंने हिम्मत नही हारी.  बचपन में इनका एक पैर पोलियो ग्रस्त हो गया. पैरों में Braces पहन कर इन्होंने चलना शुरू किया. 12 वर्ष की अवस्था में जब यह मरी के P A F cadet college Boarding school में अपने भाई के साथ पढ़ रहे थे तब अचानक ही इन्हें पोलियो का एक दौरा पड़ा जिससे चलने में तकलीफ होने लगी. फिर भी इन्होंने हिम्मत नही हारी. धीरे धीरे ही सही चलना जारी रखा. जब यह Bsc कर रहे थे तब यह सीढ़ियों से गिर पड़े. इनके सर पर गंभीर चोट लगी. काफी इलाज के बाद भी कोई फायदा नही हुआ. जीवन के दस साल इन्होंने बिस्तर पर पड़े हुए काटे. इस दौरान इनकी दुनिया इनके कमरे तक सिमट गई. ऐसे में किसी फरिश्ते की भांति पाकिस्तान के NGO SAAYA Foundation ने इनके जीवन में कदम रखा. SAAYA Association शारीरिक रूप से अक्षम लोगों का समूह है. इसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों की स्थिति सुधारने में उनकी सहायता करना है ताकि वह समाज में सर उठा कर जी...
समस्या होने पर उसे विवेक द्वारा हल करना चाहिए। 

सहिष्णुता और भारत

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सहिष्णुता और भारत सहिष्णुता का अर्थ है सहन करना. व्यापक अर्थ में सहिष्णुता का अर्थ है अपना आचरण इस प्रकार रखना जिससे दूसरों को कष्ट ना हो. यहाँ कष्ट से आशय दैहिक तथा मानसिक दोनों प्रकार के कष्टों से है.   सहिष्णुता हमें सिखाती है कि दूसरों की भावनाओं उनके विचारों का सम्मान किया जाए.  भारत की भूमि शताब्दियों से विभिन्न विचारधाराओं की जननी रही है. यहाँ वात्स्यायन के कामसूत्र को स्वीकृति मिली है तो वेदव्यास के वेदांतसूत्र को भी लोगों ने सम्मान दिया है. जहाँ निराकार ब्रह्म की अवधारणा है तो साकार रुप में बहुदेवों के पूजन की भी प्रथा रही है.   सनातन धर्म के अतिरिक्त यहाँ बौद्ध, जैन तथा सिख धर्म का जन्म हुआ है.  ईसाई धर्म भारत में सदियों पुराना है. कई यूरोपीय देशों में इसका प्रसार होने से पहले भारत में इसका आगमन हुआ. भारत में हिंदू धर्म के बाद इस्लाम ऐसा धर्म है जिसके मानने वालों की संख्या सबसे अधिक है. यहूदी, पारसी तथा बहाई धर्म के लोगों को मानने वाले लोग भी इस देश में पाए जाते हैं.  हमारी कई परंपराएं रीति रिवाज़ हमारी सांझी विरासत की देन हैं. विभिन्नत...

रुक जाना नहीं

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रुक जाना नहीं  जब समय आपके प्रति कठोर हो तब अपने आप को और अधिक कठोर बनाएं. यह आपको मुसीबतों का सामना करने में मदद करेगा. कुछ इसी तरह की सोंच है CA चिराग चौहान की. मुसीबतों से हार ना मानने का इनका जज़्बा काबिले तारीफ है.  18 वर्ष की आयु में पिता का साया सर से उठ गया. अपनी ज़िम्मेदारियों को समझते हुए इन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने का निश्चय किया. इसके लिए चिराग ने Charted Accountancy के कोर्स में दाखिला लिया. साथ ही साथ इन्होंने Graduation में भी प्रवेश लिया. एक दृढ़ निश्चय के साथ दोनों परीक्षाओं की तैयारी आरंभ कर दी. स्नातक में प्रथम श्रेणी प्राप्त की. साथ ही साथ CA की PE II की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली. Articleship के लिए इन्होंने M/S A.J. Shah & Co. को चुना. यहाँ अपना काम चिराग को बहुत पसंद आ रहा था. गाड़ी बहुत अच्छी चल रही थी. लेकिन 11 July 2006 का दिन इनके जीवन में बड़ा भूचाल लेकर आया. इसकी शुरुआत आम दिनों की तरह ही हुई थी. रोज़ की तरह चिराग अपने काम पर गए. काम जल्दी ख़त्म हो जाने के कारण उन्होंने घर लौटने के लिए लोकल ट्रेन पकड़ी. सारा मुंबई लोकल ट्रेन...
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आज देश की दो महान महिला विभूतियों का जन्मदिन है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और श्रीमती इंदिरा गांधी। दोनों ही वीरता , साहस तथा दृढ़ता का प्रतीक हैं। झांसी की रानी ने वीरता और साहस से अंग्रेज़ों का मुकाबला किया। उन्होंने पुरुष प्रधान समाज को दिखा दिया की जिन हाथों में चूड़ियां खनकती हैं वही तलवार भी टकरा सकते हैं। श्रीमती इंदिरा गांधी ने इस विशाल प्रजातंत्र की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। वह एक दृढ व्यक्तित्व की स्वामिनी थीं। विविधता से भरे इस देश की कमान उन्होंने बहुत ही सूझबूझ के साथ सम्हाली। दोनों ही महिलाओं को शत शत नमन।