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किरन की आशा

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किरन की आशा उन झुग्गी बस्तियों में जहाँ चारों तरफ गंदगी गरीबी और अशिक्षा फैली हो वहाँ आशा का संचार करने वाली हैं डॉ. किरन मार्टिन. इन्होंने ASHA society नामक एक NGO की स्थापना की जिसका उद्देश्य समाज के पिछड़े वर्ग तथा महिलाओं को समानता शिक्षा तथा स्वास्थ का अधिकार दिलाना है. डॉ. किरन एक Pediatrician हैं जो अपने अपने NGO के द्वारा समाज की सेवा करती हैं. उनके जीवन में परिवर्तन तब आया जब 1988 में दक्षिणी दिल्ली की डॉ. अम्बेदकर झुग्गी बस्ती में Cholera फैल गया. वहाँ के हालात देख कर उन्होंने निश्चय किया कि वह समाज के गरीब और पिछड़े लोगों के लिए कुछ करेंगी. अतः अपनी जैसी सोंच रखने वाले लोगों को एकत्रित कर उन्होंने ASHA Society का निर्माण किया. ASHA ने अपने कार्यक्रमों द्वारा 4 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुँचाया है. 50 से अधिक दिल्ली की झुग्गी बस्तियों को आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया. झुग्गी बस्ती में रहने वाले होनहार विद्यार्थियों के लिए ASHA ने एक विशेष कार्यक्रम Education for slum children चलाया जिसके द्वारा कई बच्चों को उच्च शिक्षा पाने में मदद मिली. Dr किरन को उनके...

उम्मीद की किरण

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उम्मीद की किरण जब चारों तरफ नफ़रत, धार्मिक उन्माद, अविश्वास का माहौल हो तब कुछ किस्से अंधेरे में उम्मीद की किरण बन कर सामने आते हैं। ऐसा ही एक वाक़या मुंबई में हुआ। एक मुस्लिम महिला नूरजहाँ ने अपने बेटे को एक गणपति मंदिर में जन्म दिया। २९ सितम्बर को इलियाज़ शेख की नींद अपनी गर्भवती पत्नी की प्रसव पीड़ा सुन कर खुली। उन्होंने फ़ौरन Taxi बुलाई और पास के Scion Hospital की ओऱ चल दिए। किंतु विजयनगर की तंग गलियों के कारण Taxi तेज़ी से नहीं बढ़ पा रही थी। Taxi driver नहीं चाहता था कि की बच्चे का जन्म उसकी Taxi में हो। अतः उसने उनसे Taxi छोड़ने को कहा। इलियाज़ ने देखा की वो एक गणपति मंदिर के सामने हैं। कोई और उपाय न देख कर उन्होंने  अपनी पत्नी को मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा दिया।  इलियाज़ कुछ करते उससे पहले ही मंदिर के बरामदे में बैठी कुछ महिला भक्त स्थिति को भांप कर मदद के लिए आगे आईं।  आनन फ़ानन आस पास के घरों से चादरें साड़ियां इत्यादि एकत्र कर प्रसव कक्ष बनाया गया और कुछ बुज़र्ग महिलाओं के संरक्षण में नूरजहाँ का प्रसव कराया गया।  सारे तनाव को चीरता हुआ नए जन्मे बच्...

उड़ान हौंसले की

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उड़ान हौंसले की  मुश्किलों में भी हंसना हमे आता है दरिया गहरा हुआ तो क्या  तैरना हमे आता है    अब किसको है परवाह हार या जीत की  हर लड़ाई को हिम्मत से लड़ना हमे आता है ये पंक्तियां पेशे से CA संकेत कल्याणी के हौसले उनकी हिम्मत उनके जज़्बे को दर्शाती हैं. संकेत हार ना मानने वाले जज़्बे की मिसाल हैं. अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद संकेत ने हिम्मत नही हारी और Charted accountancy की पढ़ाई पूरी की.  5 वर्ष की आयु तक संकेत का बचपन एक सामान्य बच्चे की भांति ही बीत रहा  था. माता पिता ने उनका दाखिला एक प्रतिष्ठित स्कूल में कराया. लेकिन एक दिन उनके दाएं हाथ में पीड़ा महसूस हुई. उनके माता पिता उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गए. डॉक्टर ने कहा कि खेलते हुए इसे चोट लग गई होगी. इसी कारण पीड़ा हो रही होगी. अतः घबराने की ज़रूरत नही है. कुछ दिन सही बीतने के बाद उनके बांए हाथ में दर्द उठा फिर कुछ दिनों के बाद उनके बांए पैर में कंपन महसूस होने लगा. स्थिति की असमान्यता को भांप कर उनके माता पिता उन्हें मशहूर Orthopaedic के पास ले गए. कुछ परीक्षणों के बाद डॉक्टर...

ये कहाँ आ गए हम........

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ये कहाँ आ गए हम........ आज मैने एक अजीब सा मंजर देखा. गांधी जी की प्रतिमा के नीचे बैठे एक गाय को रोते देखा. इस अजीब दृश्य को देखकर मुझसे रहा नही गया. मैने उससे पूंछा कि वह क्यों रो रही है.  डबडबाई आंखों से मेरी तरफ देख कर वह बोली " मैं पशुओं में सबसे सीधी मानी जाती हूँ. बिना किसी भेदभाव के सबको अपना दूध पिलाती हूँ. जब तक संकट ना हो सींग भी नही चलाती हूँ. मैं तो हर कौम की माँ हूँ. लेकिन मेरा नाम लेकर लोगों ने एक निर्दोष को पीट पीट कर मार दिया. मेरा तो कलेजा फटा जा रहा है. बिना किसी दोष के मैं स्वयं को दोषी समझ रही हूँ. " मेरी तरफ प्रश्न भरी दृष्टी डालकर वह बोली " मैं तो पशु हूँ. कुदरत ने मुझे सोंचने की शक्ति नही दी है. लेकिन तुम इंसान तो सबसे समझदार प्राणी हो. फिर तुम लोगों ने कुछ क्यों नही सोंचा. " उसकी बात का मेरे पास कोई उत्तर नही था. उससे नज़रें चुराने के लिए मैं इधर उधर देखने लगा. तभी मेरी दृष्टि गांधी जी पर पड़ी. गोल चश्मे के पीछे उनकी आंखों में मुझे उदासी दिखाई पड़ी.

धार्मिक सद्भाव

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धार्मिक सद्भाव  जहाँ अक्सर हमें धर्म के नाम पर होने वाले दंगों के बारे में सुनते रहते हैं वहीं अंधेरे में प्रकाश किरण बनकर कुछ किस्से ऐसे सुनाई देते हैं जो समाज को अमन और प्यार का संदेश देते हैं. पंजाब के सरवरपुर गांव के निवासी जोगा सिंह ने आपसी भाईचारे की ऐसी ही मिसाल पेश की है. दरअसल सिक्खों के इस गांव में केवल 10 मस्लिम परिवार हैं. इबादत के लिए वहाँ एक भी मस्जिद नही थी. क्योंकी गांव की  मस्जिद दंगों में ध्वस्त हो गई थी. पेशे से किसान जोगा सिंह को यह बात अच्छी नही लगती थी कि उनके गांव के मुसलमानों को दस कि.मी. दूर जुम्मे तथा ईद की नमाज़ के लिए जाना पड़ता है. अतः उन्होंने बर्मिंघम में बसे अपने भाई से मदद मांगी. भाई की मदद और गांव वालों के सहयोग से गांव में नई मस्जिद का निर्माण किया गया. जोगा सिंह का कहना है कि मस्जिद का निर्माण कर हमने अपने कर्तव्य का पालन किया है. https://youtu.be/zVSCB5mYJi4 https://youtu.be/zVSCB5mYJi4

सकारात्मक्ता के प्रतीक

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सकारात्मक्ता के प्रतीक Paralysis of Cervical cord  उस स्थिति को कहते हैं जहाँ रीढ़ की हड्डी के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण गर्दन के नीचे के हिस्से में कोई भी चेतना नही रह जाती है. अतः शरीर के अंगों पर कोई नियंत्रण नही रह जाता और व्यक्ति की नवजात शिशु के समान देखभाल करनी पड़ती है. ज़रा सोंच कर देखिए यदि युवावस्था में जब कोई अपने कैरियर के शिखर पर हो, अचानक यदि उसे इस स्थिति का सामना करना पड़े तो उस पर क्या बीतेगी. उसके लिए जीवन एक दुस्वप्न बन जाएगा. केवल 29 वर्ष की आयु में गिरीश गोगिआ के साथ ऐसा ही हादसा हुआ. जब एक Architect के तौर पर उनका कैरियर बहुत अच्छा चल रहा था गोवा में समुद्र में गोता लगाने के दौरान उनकी Cervical cord बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. इस दुर्घटना के कारण गिरीश शारीरिक रूप से अक्षम हो गए. अचानक स्वयं को अस्पताल के बिस्तर पर पाकर गिरीश हताशा में डूब गए. स्वयं को हिला तक ना पाने की लाचारी उनकी आँखों में आंसू ले आती थी. जब करने को कुछ नहीं था तब उनके दिमाग में अनेक प्रकार के विचार उत्पन्न होते थे. इस दौरान उन्होंने अनुभव किया कि विचारों का आप पर बहुत अधिक प्रभा...

गणपति बप्पा मोरिया

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गणपति बप्पा मोरिया  देश के कई हिस्सों खासकर महाराष्ट्र में गणेश उत्सव बहुत धूमधाम से बनाया जाता है. भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के तौर पर मनाया जाता है. इसी दिन से गणेश उत्सव का आरंभ होता है जो अगले दस दिनों तक चलता है.  इसके लिए विशाल पंडाल बनाए जाते हैं जिनमे गजानन की विभिन्न मुद्राओं वाली प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की जाती है. प्रतिदिन प्रातः एवं संध्या काल में पूरे विधिविधान से गणपति की पूजा अर्चना और आरती की जाती है. लम्बोदर के प्रिय मोदकों का भोग लगाया जाता है. पंडालों की सज्जा पर विशेष ध्यान दिया जाता है. गणेश उत्सव समितियों द्वारा कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. उत्सव के अंत में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया जाता है. गणपति को विदा करते हुए लोग भावुक हो जाते हैं और विघ्नहर्ता से विनय करते हैं कि अगले वर्ष जल्दी आएं.  कुछ लोग घरों में भी गणपति की प्रतिमा स्थापित करते हैं. इसकी अवधि 3,5 या 11 दिन हो सकती है. जिसके बाद प्रतिमाओं का विसर्जन होता है. लोग बेसब्री से अगले वर्ष की प्रतीक्षा करते हैं ताकी प्यारे बप्पा का पुनः स...