उम्मीद की किरण
उम्मीद की किरण
जब चारों तरफ नफ़रत, धार्मिक उन्माद, अविश्वास का माहौल हो तब कुछ किस्से अंधेरे में उम्मीद की किरण बन कर सामने आते हैं। ऐसा ही एक वाक़या मुंबई में हुआ। एक मुस्लिम महिला नूरजहाँ ने अपने बेटे को एक गणपति मंदिर में जन्म दिया।
२९ सितम्बर को इलियाज़ शेख की नींद अपनी गर्भवती पत्नी की प्रसव पीड़ा सुन कर खुली। उन्होंने फ़ौरन Taxi बुलाई और पास के Scion Hospital की ओऱ चल दिए। किंतु विजयनगर की तंग गलियों के कारण Taxi तेज़ी से नहीं बढ़ पा रही थी। Taxi driver नहीं चाहता था कि की बच्चे का जन्म उसकी Taxi में हो। अतः उसने उनसे Taxi छोड़ने को कहा। इलियाज़ ने देखा की वो एक गणपति मंदिर के सामने हैं। कोई और उपाय न देख कर
उन्होंने अपनी पत्नी को मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा दिया। इलियाज़ कुछ करते उससे पहले ही मंदिर के बरामदे में बैठी कुछ महिला भक्त स्थिति को भांप कर मदद के लिए आगे आईं। आनन फ़ानन आस पास के घरों से चादरें साड़ियां इत्यादि एकत्र कर प्रसव कक्ष बनाया गया और कुछ बुज़र्ग महिलाओं के संरक्षण में नूरजहाँ का प्रसव कराया गया। सारे तनाव को चीरता हुआ नए जन्मे बच्चे का रुदन वातावरण में गूंज उठा।
हिंदू मुसलमान के भेद को मिटा कर मानवता जीत गई। एक उम्मीद जाग उठी कि बुराई चाहें लाख सर उठाए कभी अच्छाई को मिटा नही सकती।
https://youtu.be/now83U7y4cg
जब चारों तरफ नफ़रत, धार्मिक उन्माद, अविश्वास का माहौल हो तब कुछ किस्से अंधेरे में उम्मीद की किरण बन कर सामने आते हैं। ऐसा ही एक वाक़या मुंबई में हुआ। एक मुस्लिम महिला नूरजहाँ ने अपने बेटे को एक गणपति मंदिर में जन्म दिया।
२९ सितम्बर को इलियाज़ शेख की नींद अपनी गर्भवती पत्नी की प्रसव पीड़ा सुन कर खुली। उन्होंने फ़ौरन Taxi बुलाई और पास के Scion Hospital की ओऱ चल दिए। किंतु विजयनगर की तंग गलियों के कारण Taxi तेज़ी से नहीं बढ़ पा रही थी। Taxi driver नहीं चाहता था कि की बच्चे का जन्म उसकी Taxi में हो। अतः उसने उनसे Taxi छोड़ने को कहा। इलियाज़ ने देखा की वो एक गणपति मंदिर के सामने हैं। कोई और उपाय न देख कर
उन्होंने अपनी पत्नी को मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा दिया। इलियाज़ कुछ करते उससे पहले ही मंदिर के बरामदे में बैठी कुछ महिला भक्त स्थिति को भांप कर मदद के लिए आगे आईं। आनन फ़ानन आस पास के घरों से चादरें साड़ियां इत्यादि एकत्र कर प्रसव कक्ष बनाया गया और कुछ बुज़र्ग महिलाओं के संरक्षण में नूरजहाँ का प्रसव कराया गया। सारे तनाव को चीरता हुआ नए जन्मे बच्चे का रुदन वातावरण में गूंज उठा।
हिंदू मुसलमान के भेद को मिटा कर मानवता जीत गई। एक उम्मीद जाग उठी कि बुराई चाहें लाख सर उठाए कभी अच्छाई को मिटा नही सकती।
https://youtu.be/now83U7y4cg


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