उड़ान हौंसले की
उड़ान हौंसले की
मुश्किलों में भी हंसना हमे आता है
दरिया गहरा हुआ तो क्या
तैरना हमे आता है
अब किसको है परवाह हार या जीत की
हर लड़ाई को हिम्मत से लड़ना हमे आता है
ये पंक्तियां पेशे से CA संकेत कल्याणी के हौसले उनकी हिम्मत उनके जज़्बे को दर्शाती हैं. संकेत हार ना मानने वाले जज़्बे की मिसाल हैं. अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद संकेत ने हिम्मत नही हारी और Charted accountancy की पढ़ाई पूरी की.
5 वर्ष की आयु तक संकेत का बचपन एक सामान्य बच्चे की भांति ही बीत रहा था. माता पिता ने उनका दाखिला एक प्रतिष्ठित स्कूल में कराया. लेकिन एक दिन उनके दाएं हाथ में पीड़ा महसूस हुई. उनके माता पिता उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गए. डॉक्टर ने कहा कि खेलते हुए इसे चोट लग गई होगी. इसी कारण पीड़ा हो रही होगी. अतः घबराने की ज़रूरत नही है. कुछ दिन सही बीतने के बाद उनके बांए हाथ में दर्द उठा फिर कुछ दिनों के बाद उनके बांए पैर में कंपन महसूस होने लगा. स्थिति की असमान्यता को भांप कर उनके माता पिता उन्हें मशहूर Orthopaedic के पास ले गए. कुछ परीक्षणों के बाद डॉक्टर ने बताया कि संकेत Rheumatoid Arthritis नामक बीमारी से ग्रसित हैं. यह बीमारी 20000 में से एक बच्चे को होती है. इसके लक्षण बहुधा 40 वर्ष के बाद प्रकट होते हैं किंतु संकेत के मामले में बीमारी का पता बचपन में ही लग गया. संकेत का चलना फिरना बंद हो गया और वह सारा समय बिस्तर पर ही लेटे रहते थे. उनके माता पिता उन्हें लेकर मुंबई गए और Specialist को दिखाया. वहाँ तकरीबन एक मास रहे. लेकिन चूंकी इलाज महंगा और लंबा था उन्होंने अहमदाबाद में इलाज कराने का फैसला लिया. इलाज के तहत उनके हाथ पांव को सीधा रखने के लिए प्लास्टर में रखा जाता था. गर्मी में यह बहुत कष्टप्रद होता था. किंतु इससे कोई लाभ नही हुआ. उसी दौरान एक खास Injection जो America से मंगाना पड़ता था उन्हें लगाया जाता था.
इसके अतिरिक्त उनके माता पिता ने Homeopathy, Aayurvedic तथा Magnetic treatment जैसे विकल्पों को भी आजमाया. इन सबके कारण संकेत तथा उनके माता पिता को अनेक कष्ट सहने पड़े.
जो सबसे बड़ी चिंता उनके माता पिता को थी कि वो उनकी शिक्षा को लेकर बहुत परेशान थे. वे जानते थे कि जितना इलाज आवश्यक है उतना ही संकेत का शिक्षित होना आवश्यक है. क्योंकी उनका रोज़ाना स्कूल जाना संभव नही था अतः घर पर Private tutor उन्हें पढ़ाने आते थे. स्कूल के Administrators के सहयोग से संकेत को केवल Examinations के लिए ही स्कूल जाना पड़ता था.
12th की परीक्षा पास कर लेने के बाद संकेत ने Bachelor's degree के लिए एक कॉलेज में प्रवेश लिया. उन्हीं दिनों में उनके पिता 12th के बाद क्या किया जा सकता है पर आयोजित एक सेमीनार में गए. वहाँ वक्ता श्री संदीप सर से उनहोंने निवेदन किया कि वह एक बार उनके बेटे संकेत से मिल लें क्योंकी वह उनसे मिलने नही आ सकता है. उनका अनुरोध मानकर संदीप सर अगले दिन संकेत से मिलने उनके घर पहुंचे. उन्होंने सलाह
दी कि संकेत को Charted Accountancy के Course में स्वयं को Enroll कराना चाहिए और यहीं से संकेत को उनके जीवन का लक्ष्य मिल गया. संकेत जो कुछ अलग करने की चाह रखते थे ने CA के कठिन पाठ्यक्रम को चुनौती की तरह लिया.
किंतु जीवन में अभी कुछ और चुनौतियां आना बाकी थीं. संकेत अपने आने जाने के लिए Tricycle का प्रयोग करते थे. इस उम्मीद से की शायद वह अपने पैरों पर चल सकें उन्होंने शहर के कुछ प्रख्यात डॉक्टरों से सलाह ली. एक डॉक्टर ने उन्हें उम्मीद दी कि ऐसा हो सकता है. इसके लिए उन्हें तकरीबन एक वर्ष अस्पताल में रहना पड़ेगा. अतः एक आशा के साथ वह अस्पताल में भर्ती हो गए. जहाँ कुछ Operation होने थे जिसके कारण वह अपने पैरों पर .खड़े हो सकते थे. लेकिन कुछ Junior doctors की लापरवाही के कारण उन्हें अपना एक पांव खोना पड़ा. अचानक लगा यह आघात बहुत कठिन था. अपने माता पिता के प्रोत्साहन और अपनी जुझारू प्रवृत्ति के कारण संकेत इससे उबरने में कामयाब रहे. उन्होंने CA की पढ़ाई पर अपना पूरा ध्यान लगा दिया. गुजराती माध्यम से पढ़े संकेत को अब पढाई अग्रेज़ी में करनी थी. उन्होंने कड़ा परिश्रम किया और अंग्रेजी़ भाषा पर अधिकार कर लिया. संकेत ने मेहनत करना आरंभ कर दिया तभी एक और समस्या खड़ी हो गई. एक दिन उन्हें Epilepsy Stroke पड़ा. यह Stroke 2-3 बार समय समय पर पड़ता था. इसके कारण उनके लिए कुछ भी याद रखना संभव नही रहता था. इसके चलते उन्हें पढ़ाई में दिक्कत होने लगी. अतः CA Final की परीक्षा में पाँच प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा. उनका आत्मविश्वास डिगने लगा. यह एक कठिन घड़ी थी. किंतु अपनों के सहयोग और ख़ुद के जुझारूपन के कारण संकेत ने इस समस्या पर भी विजय प्राप्त कर ली.
संकेत का कहना है कि CA की Degree उनके उस जज़्बे की जीत है जिसने उन्हें हालातों से लड़ने की हिम्मत दी. यह जीत उनके माता पिता के कठिन परिश्रम की उनके त्याग की है. वह मानते हैं कि हिम्मत और साहस से काम लेने से कुछ भी अलभ्य नही.
आजकल संकेत Evolutionary Systems Pvt. Ltd. में कार्यरत हैं.
अपनी सफलता का श्रेय वह अपने माता पिता के साथ साथ सही मार्गदर्शन के लिए संदीप सर को देते हैं. इसके अतिरिक्त कंपनी के मैनैजर श्री हितेंद्र डागरा के भी शुक्रगुजार हैं जिन्होंने उनकी क्षमता पर विश्वास किया.
संकेत एक अच्छे कवि हैं. ICAI द्वारा उनके ऊपर एक Short film बनाई गई है. जिसका Link मैं दे रहा हूँ.
( संकेत भी Facebook पर मेरे मित्र हैं )
मुश्किलों में भी हंसना हमे आता है
दरिया गहरा हुआ तो क्या
तैरना हमे आता है
अब किसको है परवाह हार या जीत की
हर लड़ाई को हिम्मत से लड़ना हमे आता है
ये पंक्तियां पेशे से CA संकेत कल्याणी के हौसले उनकी हिम्मत उनके जज़्बे को दर्शाती हैं. संकेत हार ना मानने वाले जज़्बे की मिसाल हैं. अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद संकेत ने हिम्मत नही हारी और Charted accountancy की पढ़ाई पूरी की.
5 वर्ष की आयु तक संकेत का बचपन एक सामान्य बच्चे की भांति ही बीत रहा था. माता पिता ने उनका दाखिला एक प्रतिष्ठित स्कूल में कराया. लेकिन एक दिन उनके दाएं हाथ में पीड़ा महसूस हुई. उनके माता पिता उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गए. डॉक्टर ने कहा कि खेलते हुए इसे चोट लग गई होगी. इसी कारण पीड़ा हो रही होगी. अतः घबराने की ज़रूरत नही है. कुछ दिन सही बीतने के बाद उनके बांए हाथ में दर्द उठा फिर कुछ दिनों के बाद उनके बांए पैर में कंपन महसूस होने लगा. स्थिति की असमान्यता को भांप कर उनके माता पिता उन्हें मशहूर Orthopaedic के पास ले गए. कुछ परीक्षणों के बाद डॉक्टर ने बताया कि संकेत Rheumatoid Arthritis नामक बीमारी से ग्रसित हैं. यह बीमारी 20000 में से एक बच्चे को होती है. इसके लक्षण बहुधा 40 वर्ष के बाद प्रकट होते हैं किंतु संकेत के मामले में बीमारी का पता बचपन में ही लग गया. संकेत का चलना फिरना बंद हो गया और वह सारा समय बिस्तर पर ही लेटे रहते थे. उनके माता पिता उन्हें लेकर मुंबई गए और Specialist को दिखाया. वहाँ तकरीबन एक मास रहे. लेकिन चूंकी इलाज महंगा और लंबा था उन्होंने अहमदाबाद में इलाज कराने का फैसला लिया. इलाज के तहत उनके हाथ पांव को सीधा रखने के लिए प्लास्टर में रखा जाता था. गर्मी में यह बहुत कष्टप्रद होता था. किंतु इससे कोई लाभ नही हुआ. उसी दौरान एक खास Injection जो America से मंगाना पड़ता था उन्हें लगाया जाता था.
इसके अतिरिक्त उनके माता पिता ने Homeopathy, Aayurvedic तथा Magnetic treatment जैसे विकल्पों को भी आजमाया. इन सबके कारण संकेत तथा उनके माता पिता को अनेक कष्ट सहने पड़े.
जो सबसे बड़ी चिंता उनके माता पिता को थी कि वो उनकी शिक्षा को लेकर बहुत परेशान थे. वे जानते थे कि जितना इलाज आवश्यक है उतना ही संकेत का शिक्षित होना आवश्यक है. क्योंकी उनका रोज़ाना स्कूल जाना संभव नही था अतः घर पर Private tutor उन्हें पढ़ाने आते थे. स्कूल के Administrators के सहयोग से संकेत को केवल Examinations के लिए ही स्कूल जाना पड़ता था.
12th की परीक्षा पास कर लेने के बाद संकेत ने Bachelor's degree के लिए एक कॉलेज में प्रवेश लिया. उन्हीं दिनों में उनके पिता 12th के बाद क्या किया जा सकता है पर आयोजित एक सेमीनार में गए. वहाँ वक्ता श्री संदीप सर से उनहोंने निवेदन किया कि वह एक बार उनके बेटे संकेत से मिल लें क्योंकी वह उनसे मिलने नही आ सकता है. उनका अनुरोध मानकर संदीप सर अगले दिन संकेत से मिलने उनके घर पहुंचे. उन्होंने सलाह
दी कि संकेत को Charted Accountancy के Course में स्वयं को Enroll कराना चाहिए और यहीं से संकेत को उनके जीवन का लक्ष्य मिल गया. संकेत जो कुछ अलग करने की चाह रखते थे ने CA के कठिन पाठ्यक्रम को चुनौती की तरह लिया.
किंतु जीवन में अभी कुछ और चुनौतियां आना बाकी थीं. संकेत अपने आने जाने के लिए Tricycle का प्रयोग करते थे. इस उम्मीद से की शायद वह अपने पैरों पर चल सकें उन्होंने शहर के कुछ प्रख्यात डॉक्टरों से सलाह ली. एक डॉक्टर ने उन्हें उम्मीद दी कि ऐसा हो सकता है. इसके लिए उन्हें तकरीबन एक वर्ष अस्पताल में रहना पड़ेगा. अतः एक आशा के साथ वह अस्पताल में भर्ती हो गए. जहाँ कुछ Operation होने थे जिसके कारण वह अपने पैरों पर .खड़े हो सकते थे. लेकिन कुछ Junior doctors की लापरवाही के कारण उन्हें अपना एक पांव खोना पड़ा. अचानक लगा यह आघात बहुत कठिन था. अपने माता पिता के प्रोत्साहन और अपनी जुझारू प्रवृत्ति के कारण संकेत इससे उबरने में कामयाब रहे. उन्होंने CA की पढ़ाई पर अपना पूरा ध्यान लगा दिया. गुजराती माध्यम से पढ़े संकेत को अब पढाई अग्रेज़ी में करनी थी. उन्होंने कड़ा परिश्रम किया और अंग्रेजी़ भाषा पर अधिकार कर लिया. संकेत ने मेहनत करना आरंभ कर दिया तभी एक और समस्या खड़ी हो गई. एक दिन उन्हें Epilepsy Stroke पड़ा. यह Stroke 2-3 बार समय समय पर पड़ता था. इसके कारण उनके लिए कुछ भी याद रखना संभव नही रहता था. इसके चलते उन्हें पढ़ाई में दिक्कत होने लगी. अतः CA Final की परीक्षा में पाँच प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा. उनका आत्मविश्वास डिगने लगा. यह एक कठिन घड़ी थी. किंतु अपनों के सहयोग और ख़ुद के जुझारूपन के कारण संकेत ने इस समस्या पर भी विजय प्राप्त कर ली.
संकेत का कहना है कि CA की Degree उनके उस जज़्बे की जीत है जिसने उन्हें हालातों से लड़ने की हिम्मत दी. यह जीत उनके माता पिता के कठिन परिश्रम की उनके त्याग की है. वह मानते हैं कि हिम्मत और साहस से काम लेने से कुछ भी अलभ्य नही.
आजकल संकेत Evolutionary Systems Pvt. Ltd. में कार्यरत हैं.
अपनी सफलता का श्रेय वह अपने माता पिता के साथ साथ सही मार्गदर्शन के लिए संदीप सर को देते हैं. इसके अतिरिक्त कंपनी के मैनैजर श्री हितेंद्र डागरा के भी शुक्रगुजार हैं जिन्होंने उनकी क्षमता पर विश्वास किया.
संकेत एक अच्छे कवि हैं. ICAI द्वारा उनके ऊपर एक Short film बनाई गई है. जिसका Link मैं दे रहा हूँ.
( संकेत भी Facebook पर मेरे मित्र हैं )



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