सकारात्मक्ता के प्रतीक
सकारात्मक्ता के प्रतीक
Paralysis of Cervical cord उस स्थिति को कहते हैं जहाँ रीढ़ की हड्डी के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण गर्दन के नीचे के हिस्से में कोई भी चेतना नही रह जाती है. अतः शरीर के अंगों पर कोई नियंत्रण नही रह जाता और व्यक्ति की नवजात शिशु के समान देखभाल करनी पड़ती है.
ज़रा सोंच कर देखिए यदि युवावस्था में जब कोई अपने कैरियर के शिखर पर हो, अचानक यदि उसे इस स्थिति का सामना करना पड़े तो उस पर क्या बीतेगी. उसके लिए जीवन एक दुस्वप्न बन जाएगा.
केवल 29 वर्ष की आयु में गिरीश गोगिआ के साथ ऐसा ही हादसा हुआ. जब एक Architect के तौर पर उनका कैरियर बहुत अच्छा चल रहा था गोवा में समुद्र में गोता लगाने के दौरान उनकी Cervical cord बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. इस दुर्घटना के कारण गिरीश शारीरिक रूप से अक्षम हो गए. अचानक स्वयं को अस्पताल के बिस्तर पर पाकर गिरीश हताशा में डूब गए. स्वयं को हिला तक ना पाने की लाचारी उनकी आँखों में आंसू ले आती थी. जब करने को कुछ नहीं था तब उनके दिमाग में अनेक प्रकार के विचार उत्पन्न होते थे. इस दौरान उन्होंने अनुभव किया कि विचारों का आप पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है. सकारात्मक विचार आपको प्रसन्न रखते हैं तथा हालातों से लड़ने की शक्ति देते हैं. जबकी नकारात्मक विचार निराशा की ओर ले जाते हैं. अतः उन्होंने निश्चय किया कि स्वयं को हालात का शिकार नही होने देंगे. वह लड़ेंगे और जीतेंगे. उनका शरीर भले ही पूर्णरूप से कार्य ना करता हो किंतु उनका मष्तिष्क पूर्णरूप से कार्यशील है.
आज तकरीबन 14 वर्षों के बाद जबकी उनका 90 फीसदी शरीर Paralyzed है वह दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं. वह एक Motivational speaker हैं. Corporates, NGOs तथा शिक्षण संस्थाओं की मदद से वह समय समय पर Inspirational workshops का आयोजन कर लोगों को प्रेरित करते हैं. एक Interior designer के तौर पर वह देश विदेश में कई Projects कर चुके हैं.
उनका मानना है कि सहारात्मक विचार ही हमें आगे ले जा सकते हैं. अतः सदैव सकारात्मक सोंच रखें. नकारात्मकता को स्वयं पर हावी ना होने दें. हालात चाहें कैसे हों हिम्मत के साथ उनका सामना किया जा सकता है. यह हिम्मत तभी आएगी जब हम सकारात्मक सोंच रखेंगे. आज जब उनकी पत्नी भी 70 प्रतिशत Paralysis का शिकार हैं उनका यही दृष्टिकोंण लड़ने की शक्ति देता है.
ज़रा सोंच कर देखिए यदि युवावस्था में जब कोई अपने कैरियर के शिखर पर हो, अचानक यदि उसे इस स्थिति का सामना करना पड़े तो उस पर क्या बीतेगी. उसके लिए जीवन एक दुस्वप्न बन जाएगा.
केवल 29 वर्ष की आयु में गिरीश गोगिआ के साथ ऐसा ही हादसा हुआ. जब एक Architect के तौर पर उनका कैरियर बहुत अच्छा चल रहा था गोवा में समुद्र में गोता लगाने के दौरान उनकी Cervical cord बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. इस दुर्घटना के कारण गिरीश शारीरिक रूप से अक्षम हो गए. अचानक स्वयं को अस्पताल के बिस्तर पर पाकर गिरीश हताशा में डूब गए. स्वयं को हिला तक ना पाने की लाचारी उनकी आँखों में आंसू ले आती थी. जब करने को कुछ नहीं था तब उनके दिमाग में अनेक प्रकार के विचार उत्पन्न होते थे. इस दौरान उन्होंने अनुभव किया कि विचारों का आप पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है. सकारात्मक विचार आपको प्रसन्न रखते हैं तथा हालातों से लड़ने की शक्ति देते हैं. जबकी नकारात्मक विचार निराशा की ओर ले जाते हैं. अतः उन्होंने निश्चय किया कि स्वयं को हालात का शिकार नही होने देंगे. वह लड़ेंगे और जीतेंगे. उनका शरीर भले ही पूर्णरूप से कार्य ना करता हो किंतु उनका मष्तिष्क पूर्णरूप से कार्यशील है.
आज तकरीबन 14 वर्षों के बाद जबकी उनका 90 फीसदी शरीर Paralyzed है वह दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं. वह एक Motivational speaker हैं. Corporates, NGOs तथा शिक्षण संस्थाओं की मदद से वह समय समय पर Inspirational workshops का आयोजन कर लोगों को प्रेरित करते हैं. एक Interior designer के तौर पर वह देश विदेश में कई Projects कर चुके हैं.
उनका मानना है कि सहारात्मक विचार ही हमें आगे ले जा सकते हैं. अतः सदैव सकारात्मक सोंच रखें. नकारात्मकता को स्वयं पर हावी ना होने दें. हालात चाहें कैसे हों हिम्मत के साथ उनका सामना किया जा सकता है. यह हिम्मत तभी आएगी जब हम सकारात्मक सोंच रखेंगे. आज जब उनकी पत्नी भी 70 प्रतिशत Paralysis का शिकार हैं उनका यही दृष्टिकोंण लड़ने की शक्ति देता है.
उनकी इच्छा है कि वह देश विदेश में घूमकर लोगों में सकारात्मकता का प्रचार करें जिससे वह अपने जीवन को अर्थपूर्ण बना सकें. लोग उन्हें The Positive man कह कर बुलाते हैं.
( गिरीश Facebook पर मेरे मित्र हैं और प्रेरणा के स्रोत हैं. )


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