हमारी प्यारी भाषा हिंदी
हमारी प्यारी भाषा हिंदी
इस भाषा को समृध्द करने में कई साहित्यकारों का योगदान रहा है। गद्य हो या पद्य दोनों का ही विशाल कोष उपलब्ध है। जहाँ कबीरदास और रहीमदास के नीति उपदेशक दोहे हैं वहीं सूरदास और रसखा़न और मीरा के कृष्ण भक्ति के पद। श्रृंगार रस है तो वीर रस भी है। हमारी प्यारी हिंदी सहित्यिक रूप से बहुत अमीर है।
सहजता के कारण यह जनसाधारण की भाषा है। यह जितनी विशाल है उतनी ही उदार भी. अंग्रेजी़ एवं उर्दू के कई शब्दों को इसने सहजता से अपनाया है। कई गै़र हिंदी भाषी इसे अपने प्रकार से बोलते हैं। जिसमें उनका प्रांतीय असर दिखाई देता है। इसने कई प्रकार के लहज़ों को जन्म दिया है तथा हिंदी को एक लोकप्रिय भाषा बनने में मदद की है।
हमें भी इस सुंदर भाषा के प्रचार में अपनी सार्मथ्य के अनुसार प्रयास करना चाहिए।

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