लक्ष्य तो हर हाल में पाना है

लक्ष्य तो हर हाल में पाना है


कहते हैं जो अपना सब कुछ लक्ष्य पर कुर्बान करने को तैयार होते हैं वह अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करते हैं. ऐसे ही जज़्बे की मिसाल हैं युवराज बाल्मीकी.
Club तथा Regional hockey खेलने वाले युवराज को तब धक्का लगा जब 2009 में Junior world cup hockey team के लिए चुने जाने के बावजूद आखिरी क्षणों में उन्हें drop कर दिया गया. किंतु हिम्मत के धनी युवराज ने हार नही मानी.
युवराज का जन्म मुंबई की Marine lines slum में हुआ था. इनके पिता एक Taxi driver तथा माँ एक गृहणी थीं. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी किंतु फिर भी युुवराज के माता पिता ने उन्हें तथा उनके भाइ़यों को स्कूल भेजने की व्यवस्था की.
घर में बिजली पानी तथा शौचालय जैसी सुविधाओं का आभाव था. लेकिन इस माहौल में भी युवराज में कुछ कर दिखाने की चाह थी. उन्होंने एक खिलाडी़ बनने का निश्चय किया. पहले उनकी रुचि क्रिकेट में थी किंतु महंगी Training fees तथा Kit के कारण उन्होंने अपना इरादा त्याग दिया. 
एक दिन युवराज की नज़र समाचारपत्र में छपे अपने एक सहपाठी बून डिसूजा़ के चित्र पर पडी़. बून मुंबई के एक प्रसिद्ध हॉकी क्लब Republicans के लिए खेलता था. युवराज ने हॉकी खिलाडी़ बनने का निश्चय किया. उनके निश्चय से प्रभावित होकर बून ने उनकी सहायता का फैसला लिया और उन्हें क्लब के कोच मेर्ज़बान पटेल से मिलवाया. अपने कोच की सहायता से युवराज 2003 में Republicans के लिए खेले और सर्वश्रेष्ठ खिलाडी़ चुने गए. 2005 में उन्हें Bank of India की ओर से खेलने का मौका मिला. इससे युवराज को आमदनी भी होने लगी. अब उन्हें equipments के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था. 
2006 में Mahindra & Mahindra की तरफ से दुबई जाने का अवसर मिला. वहाँ भारतीय हॉकी के दिग्गज धनराज पिल्लै की दृष्टि उन पर पडी़. धनराज ने युवराज के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचाना. उनकी सहायता से युवराज को 2007 में Indian Airlines की तरफ से खेलने का मौका मिला. 
फिर वह लम्हा आया जब अचानक Junior world cup hockey team से आखिरी वक्त पर निकाल दिया गया. युवराज को बहुत धक्का लगा. लेकिन अपने कोच तथा धनराज की सहायता से उन्होंने हार नही मानी.
फिर 2011 में जब Seniors की Team के चुनाव के लिए National camp लगा तब युवराज ने 110 खिलाड़ियों के साथ प्रतियोगिता कर 18 स्थान प्राप्त किया. चीन में खेली जाने वाली Asian champions trophy के लिए उन्हें भारतीय Team का हिस्सा बनने का मौका मिला. Penalty shoot out में इनके गोल की वजह से भारत ने पाकिस्तान को हराया. नस खिंच जाने के कारण वह 2012 Olympics के लिए Qualify नही कर सके. लेकिन वह फिर से भारतीय Team में शामिल होने के लिए प्रयासरत हैं.


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