दीप से दीप जले

दीप से दीप जले





जैसे एक दीपक अनेक दीपों को प्रज्वलित कर सकता है वैसे ही एक व्यक्ति अपने अच्छे कार्यों से कई और लोगों को प्रेरित करता है.
हमारे देश में प्रत्यारोपण के लिए अंगों की प्रतीक्षा करने वालों की एक बड़ी संख्या है. कारण है अंगदान को लेकर लोगों में कई प्रकार की भ्रांतियां हैं. इस विषय में लोग पूर्णरूप से जागरूक नही हैं. अक्सर यदि हम अंगदान करते भी हैं तो केवल अपने किसी बेहद नज़दीकी रिश्तेदार को. किसी अपरिचित को बिना किसी स्वार्थ के अंगदान करना हममें से बहुत से लोगों की सोंच से परे है.
लेकिन ऐसा कर दिखाया है केरल के त्रिशूर जिले के पादरी फादर डेविस चिरामेल ने. लोगों को प्रेम दया तथा सेवाभाव की शिक्षा देने वाले पादरी ने अपने उदाहरण से लोगों को निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया है. 
बात सन 2009 की है जब समाज सेवा के लिए विख्यात फादर डेविस को कुछ लोगों ने सूचित किया कि उनके इलाके के एक व्यक्ति गोपीनाथन जो पेशे से एक Electrician हैं को एक किडनी की आवश्यक्ता है. फादर ने उनकी सहायता के लिए पैसे एकत्र करने आरंभ किए. वह उनके पास मदद को पहुंचे और पूंछा कि किडनी देने वाला कौन है. गोपीनाथन ने बताया कि उनकी पत्नी की किडनी मेल नही खा रही है अतः वह एक ऐजेंट से किडनी खरीदेंगे. फादर को एहसास हुआ कि इस प्रकार किडनी लेना गैरकानूनी है. अतः फादर डेविस ने निश्चय किया कि यदि उनकी किडनी मेल खा गई तो वह अपनी एक किडनी गोपीनाथन को दे देंगे. सब कुछ सही था अतः फादर अपनी किडनी देने को तैयार हो गए. उनके परिचितों एवं रिश्तेदारों ने उन्हें ऐसा करने से रोके का प्रयास किया. किंतु फादर अपने निर्णय पर अटल रहे और अपनी एक किडनी गोपीनाथन को दे दी. 
वैसे तो पहले ही फादर डेविस सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद के लिए कार्य कर रहे थे लेकिन इस घटना ने उन्हें किडनी के दान के विषय में कुछ करने को प्रेरित किया. उन्होंने Kidney federation of India नामक संस्था की स्थापना की. इस संस्था का उद्देश्य लोगों को किडनी दान करने के लिए प्रेरित करना था ताकि किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करने वाले मरीजों को किडनी उपलब्ध कराई जा सके. जगह जगह घूम कर वह लोगों को भाषणों के ज़रिए अपरिचितों के लिए किडनी दान करने की अपील करते. आरंभ में उनसे केवल किडनी की प्रतीक्षा करने वाले व्यक्ति ही संपर्क करते थे. लेकिन धीरे धीरे परिस्थितियां बदलीं और कई लोग किडनी दान करने के लिए आगे आने लगे. 






उनके इस मिशन की प्रसिद्धी केरल के एक बड़े उद्योगपति V-Guard के मालिक कोचूसेफ चितिलापली तक पहुंची. उन्होंने फैसला किया कि वह भी अपनी एक किडनी किसी अपरिचित को दान करेंगे. इस फैसले के साथ वह फादर डेविस से मिले. पेशे से ड्राइवर जॉय उल्हनन जिनके साथ उनकी किडनी का मेल हो रहा था को कोचूसेफ की एक किडनी दी गई. जब यह समाचार फैला तो अन्य कई लोग भी इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए सामने आने लगे.

एक पादरी ने लोगों को प्रवचन देने की बजाय स्वयं निस्वार्थ सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया. उनकी जलाई हुई मशाल आज और कई चिरागों को रौशन कर रही है.


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KIDNEY FEDERATION OF INDIA
Pallithamam Shopping Complex, 1st Floor,
Near Kairali-Sree Theatre, North Bus Stand, Thrissur - 20, Kerala
Tel. : +91 487 2322999, +91 487 2320302,+91 4872323888
email: kidneyfederationofindia@gmail.com , frdavischiramel@gmail.com

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