स्वयं को स्वीकार करें


स्वयं को स्वीकार करें



दूसरे आपके बारे में क्या राय रखते हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने बारे में क्या राय रखते हैं. यदि आप आत्मविश्वास के साथ लोगों से मिलतेे हैं और स्वयं की शारीरिक अक्षमता को अपनी बाधा नही समझते तो लोग आपको वही प्यार और सम्मान देंगे जिसके आप हकदार हैं.
ऐसी ही सोंच रखने वाले हैं पंचकुला हरियाणा के रहने वाले सुमित मेहता. 32 वर्षीय सुमित Congenital Myopathy नामक बीमारी से ग्रसित हैं. स्वयं को अक्षम ना समझने वाले तथा आत्मविश्वास से भरे सुमित Independent IT consultant एवं Software engineer हैं. इसके अतिरिक्त सुमित शास्त्रीय संगीत में स्नातक हैं तथा इन्होंने 9 सालों तक गायन की शिक्षा ली है. शारीरिक चुनैती के बावजूद सुमित का बचपन सामान्य बच्चों की तरह ही बीता. अपनी Tricycle पर बैठ कर वह हमउम्र बच्चों के साथ निकल जाते और खूब मस्ती करते. अपने मोहल्ले में वह सभी के प्रिय थे. अपने पराए सभी से घुलमिल जाते थे. उनके इस खुले व्यवहार का कारण उनके माता पिता की प्रेरणा ही थी जो सदैव सुमित को इस बात के लिए प्रोत्साहित करते कि वह खुद को किसी से भी कम ना समझें. 
बचपन की एक घटना जिसने सुमित को आत्मविश्वास से भर दिया उन्हें आज भी याद है. अपने रिश्ते के भाई बहनों के साथ खेलते हुए एक बार ऐसा हुआ कि वह सब तो सीढ़ियां चढ़ कर आगे चले गए किंतु अपनी Tricycle में बैठे सुमित पीछे रह गए. जीवन में पहली बार उन्हें अपनी कमी का एहसास हुआ और वह रोने लगे. उनकी माँ ने जब उन्हें रोते देखा तो उनसे इसका कारण पूंछा. सुमित ने जब कारण बताया तो उनहोंने प्यार से समझाते हुए कहा " ऐसा बहुत कुछ है जो तुम कर सकते लेकिन वह सब नहीं कर सकते. अतः जो तुम नही कर सकते उसके बारे में सोंच कर दुखी मत हो. " अपनी माँ के इन शब्दों का उन पर गहरा असर पड़ा. इसके बाद वह कभी भी अपनी कमियों को लेकर दुखी नही हुए. 
आरंभ में जब सुमित की बीमारी का पता चला तो उनके माता पिता ने उनके उपचार की भरसक कोशिश की लेकिन कोई लाभ नही मिला. अतः उन्होंने सुमित की शिक्षा की तरफ ध्यान दिया. प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई. लेकिन बाद में उनका दाखिला स्कूल में कराया गया. जहां उन्होंने आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त की. यहां भी शिक्षकों एवं सहपाठियों का सहयोग बना रहा. अपने शिक्षकों के प्रोत्साहन से उन्होंने इसी दौरान संगीत व स्केचिंग सीखना शुरू किया. इन दोनों ही विधाओं का उन्होंने अच्छा अभ्यास किया और अनेक पुरस्कार जीते.
आठवीं के बाद सुमित ने National open school से दसवीं तथा बारहवीं की परीक्षा पास की. साथ ही साथ उन्होंने संगीत में स्नातक की उपाधि भी पूर्ण की.
संगीत से उन्हें बहुत प्रेम था और सभी उन्हें इसी क्षेत्र में कुछ करने के लिए प्रेरित करते. लेकिन उनके जीवन में एक बदलाव तब आया जब कंप्यूटर ने उनके जीवन में प्रवेश किया. कंप्यूटर उनके लिए नया था. जैसे जैसे सुमित इसके बारे में जानते उतना ही और जानने के लिए उत्सुक हो जाते. धीरे धीरे वह इसके प्रेम में पड़ गए और यह निश्चय किया कि वह इसी क्षेत्र में ही कुछ करेंगे. निर्णय कठिन था. संगीत में शिक्षित थे और आसानी से अपना स्थान बना सकते थे. जबकी कंप्यूटर में उन्हें एक नई शुरूआत करनी थी. लेकिन चुनौतियों से ना घबराने वाले सुमित ने कंप्यूटर को चुना. इस संबंध में सबसे बड़ी समस्या यह थी की सारे कंप्यूटर शिक्षण संस्थान ऊपरी मंज़िल पर थे. Wheelchair से ऊपरी मंज़िल पर पहुंचना कठिन था. अतः उन्होंने सावाध्याय से ही कंप्यूटर सीखने का फैसला किया और स्वयं के प्रयत्न से c, c++, Java इत्यादि भाषांएं सीखीं. सुमित ने Programming में हाथ आजमाया. प्रारंभिक असफलताओं को छोड़कर उनके बनाए Program सफल होने लगे. लेकिन उन्होंने महसूस किया कि उनके लिए डिग्री लेना आवश्यक है. अतः सुमित ने IGNOU से BCA तथा MCA किया. उन्हें कई कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिला लेकिन उन्होंने स्वतंत्र रूप से काम करने का निर्णय किया. 



जहां सुमित जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक हैं वहीं जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलू जीवनसाथी को लेकर आशावान है. उनका कहना है कि आशा रखने में क्या हर्ज़ है. हम क्यों सोंच लें कि कोई हमारे साथ अपना जीवन साझा नही करना चाहेगा.


( सुनित मेरे Facebook मित्र हैं. मेरी शुभकामना है कि उन्हें जल्द ही कोई हमसफर मिल जाए )



https://www.youtube.com/watch?v=lX9S2zYxk98

सुमित द्वारा गाया गया गीत
https://www.youtube.com/watch?v=ocRhOECKfAs

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